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ईश्वर ने मनुष्य के प्रकाशरूपी जीवात्मा को दो अनमोल रत्न प्रदान किये हैं- ख़ुशी एवं असीम शांति । माँ के गर्भ मैं जीवात्मा को इस ज्ञान का बोध होता है किन्तु धीरे-धीरे वो इस रत्नरूपी अचल सचाई से विमुख होकर “मैं” शब्द मैं लीन हो जाता है । जैसे जैसे जीवन की गाडी बाल-अवस्था से

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After one of my seminars on “Personal Effectiveness”, a young trainee asked me- “Why Do Some people Succeed but others not?? Her curious find strived to find an answer before throwing the question unto me. Luckily, I knew the answer. Let me Share the million dollar answer with all my blog readers here. Most of

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